सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

कठोपनिषद्


द्वितीय अध्याय 
तृतीय वल्ली
(तृतीय मन्त्र)


भयादस्याग्निस्तपति भयात् तपति सूर्य:।    
भयादिन्द्रश्च वायुश्च मृत्युर्धावति पञ्चम:।।३।। 

इसके भय से अग्नि तपता है, इसके भय से सूर्य तपता है , इसके भय से इन्द्र, वायु और पाँचवाँ मृत्यु (देवता) दौड़ते हैं।




1 टिप्पणी:

  1. मिश्र जी, आपको, परिजनों, व मित्रों को दीपावली की शुभकामनायें!

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